हमें
उन गतिविधियों में कतई भाग नहीं लेना चाहिए जो हमारा स्तर नीचे गिराती
हैं। इनमें शामिल हैं अवसाद-गुस्सैल लोगों से मिलना, ऐसी मूवी देखना जो
हमें दुखी करती हों या ऐसा साहित्य पढऩा जो कुछ सिरफिरे या पस्त लोगों के
बारे में हो। इसके विपरित हमें उन गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए
जो हमारे अंदर धनात्मक सोच पैदा करती हो। वस्तुत: दिमाग में पैदा होने
वाले ऋणात्मक भावों को बाहर से मिलने वाले प्रोत्साहन पूर्ण भावों से
नकारना जरूरी है- तभी आप सही अर्थों में अपना प्राप्य प्राप्त कर पाएंगे।
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